Dr.glen kanidham dhran sankalp sakti ke mahanayak

एक बार एक छोटा-सा (8 वर्ष का) बच्चा स्कूल में आग से जल तरह जल गया उसकी टाँगें बहुत बुरी तरह से से बन गई थीं। डॉक्टरों ने कहा कि वह कभी नहीं जा रही है। उसके पैरों का सारा माँस जल चुका था। अस्पताल से जब वह घर आया, तो उसकी माँ उसके पैरों की रोजाना मालिश करती है और उसे हील चेयर पर घुमाने वाले के मैदान में ले जाती है। उस बच्चे में बड़ा दृढ़ विश्वास था, उसकी संकल्पशक्ति का निले तारीफफ़ था। उसे विश्वास था कि चाहे कुछ भी हो, वह चली गई।

एक दिन जब उसकी माँ उसे ह्वील चेयर पर बैठाकर कहीं चली गई, तो उसने स्वयं को उस चेयर पर से गिरा लिया और स्वयं को घसीटना शुरू कर दिया। वह रोजाना ही ऐसा करता रहा और धीरे-धीरे उसके पैरों में कुछ जान आने लगी। उसने उठकर रखा, फिर बहुत धीरे-धीरे चलने लगा। फिर सामान्य तरीके से चलने लगा। फिर वह दौड़ने लगा।

एक दिन वह अमेरिका का एक मील दौड़ने वाला सबसे तेज धावक बन गया। उन्होंने 1500 मी की दौड़ में विश्व रिकॉर्ड बनाया। वह नहीं और डॉ। ग्लेन कनिहम थे। कनिशुम की संकल्प-शक्ति को बार-बार नमन है।

हाथों का मोहताज नहीं हौसला: 

सकारात्मक सोच के साथ ज़िद की होनी तो वास्तव में दुनिया बदल सकती है। ऐसा ही कर दिखाया है श्रीराम कॉलोनी सांगानेरी निवासी 15 वर्षीय किशोर रोशन नागर ने। वर्ष 2002 में हुए हादसे में दोनों हाथ व एक पैर गवाँ देने के बाद पढ़ाई का सपना चूर हो गया था। घर के बड़े बुजुर्गों की हिम्मत भी जवाब दे चुकी थी, लेकिन रोशन ने जिद की और आज वह दसवीं की बोर्ड परीक्षा दे रहा था। "

वर्ष 2002 में घर की छत से गुजर रही हाइटेंशन लाइन के तारों में दोस्त की पतंग सुलझाने के दौरान रोशन नंगे पैर ही छत पर चली गई। लोहे का सरिया हाथ में लेकर रोशन पतंग के लिए लपका, तो उसे ऐसा करनट लगा दिया कि एक पैर और दोनों हाथ छूट गए। दो ऑपरेशन के बाद दादा नारायण उसे घर ले आए।

इलाज के लगभग दस महीने बाद रोशन ने पढ़ने की इच्छा जाहिर की इस ज़िद पर ग्रैंड व्हना देवी ने हौसला उठाया, उन्होंने उसके हाथ में पेंसिल बाँधकर लिखने का अभ्यास करवाया। कड़ी मेहनत के बाद उन्होंने वर्ष 2003 में पांचवीं कक्षा में फिर से स्कूल जाना शुरू किया। इसी लगन के साथ उन्होंने छठी में 52%, सातवीं में 62%, आठवीं में 79% और नौवीं में 64% हासिल किए। बिना हाथ के 15 वर्षीय रोशन नागर का हौसला देखिए। रोशन ने कटे हाथ पर कलम बाँधकर जयपुर के नेवटा केन्द्र पर दसवीं की परीक्षा दी है। रोशन कहता है-वह किसी पर बोझ बनकर नहीं रहना चाहता। वह सीए बनना चाहता है

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