Panasonic success story

भरोसा खुदा पर हैं तो जो लिखा हैं तकदीर में वही पाओगे लेकिन भरोसा अगर खुद पे हैं तो खुदा वही लिखेगा जो आप चाहोगे ।

दोस्तो यह कहानी भी अटूट विश्वास की कहानी हैं जिसमें कम पडा़ लिखा गरीब बच्चा केवल अपने विश्वास के दम पर अरबो रुपये का सम्राज खड़ा कर देता हैं और याकिन मानिये अगर आप ने इस कहानी को अच्छे से पढ़ लिया तो आप का विश्वास कई गुना बड़ जायेगा ।
दोस्तो ये कहानी आज से लग- भग 127  साल पहले जापान के  एक छोटे से गाँव के किसान के घर जन्मे एक बच्चे के जिसका नाम konosuke रखा गया जब konosuke केवल 9 वर्ष का था तो उसके पिता कुछ आर्थिक परेशानी के वजह से गाँव के अपनी सारी जमीन बेचनी पड़ी और अपना गाँव तक छोड़ना पड़ा गाँव में गँवा चुके konosuke के पिता परिवार सहित शहर में आ गये और परिवार के पालन पोषण के लिये कुछ छोटे - मोटे काम करने लगे अपने अपने परिवार की मद्दत के लिये 9 वर्ष के konosuke  को अपनी पढ़ाई छोड़ एक दुकान पर काम करना पड़ा यहाँ वे सूरज के पहले किरण मे उठना दुकान अच्छे से साफ - सफाई करता और  साथ मे दुकान के कुछ अन्य छोटे - मोटे काम निपटाने के बाद अपने मालिक के बच्चो की सेवा देख भाल मे लग जाया करता और कुछ माहिने इसी तरह बीत गये लेकिन कुछ माहिने के बाद उस दुकान में मन्दा के कारण दुकान के मालिक ने konosuke को काम निकाल दिया और इस के बाद konosuke ने एक साईकिल बेचने वाली दुकान पर नौकरी शुरु कर दी उस जमाने में साईकिल एक लगजरी आईटम मानी जाती थी और UK से import किये जाते थे इस चौक पर साईकिल बेचने के साथ - साथ कुछ मैंटल वर्क का काम भी होता था और konosuke को वह अन्य कामो के साथ-साथ लेंथ और अन्य टेक्निकल बारे मे बहुत कुछ को मिला konosuke ने यहाँ लग- भग 5 वर्ष काम किया और 15 वर्ष की उम्र मे वह कुछ नया ढुंढ़ने लगा जहाँ काम के साथ- साथ वो कुछ नया सिख सके और भविष्य में बिज्ली की बड़ती सम्भावनाओ को देखते हुये उसे गला की इसी क्षेत्र में कौई नौकरी ढुढ़ लेनी चाहिए और एक दिन usha का इलेक्ट्रोनिक लाईट कम्पनी का विज्ञापन मिला जिसमे कम्पनी को कुछ नये विज्ञापन मिला जिसमे कम्पनी को नये  employees की जारुरत थी और employee करने पर konosuke को वहाँ नौकरी भी गई और इसी की दौरान हर रोज उसे काफी कुछ सिखने को भी मिलने लगा धीरे - धीरे समय बित्ता और समय के साथ - साथ konosuke जहाँ एक ओर नौकरी के दौरान बहुत कुछ सिख रहा था । वही दुसरी ओर वे अपनी खाली समय मे इलेक्ट्रीसिटी से सम्बन्धित बहुत सी पुस्तके पढ़ा करता और साथ में कुछ छोटे - मोटे experiment किया करता ।
20 वर्ष की आयु में उसका विवाह हो गया और थोड़ी सी जिम्मेदारी भी बड़ गई 22 वर्ष के उम्र तक वो आपने काबिलियत से कम्पनी मे टेक्निकल इंस्पेक्टर बन गया जो उस समय एक बहूत बडी पोजिशन मानी जाती थी इस दौरान उसने अपने खाली समय का इस्तेमाल करते हुये एक नया improved इलेक्ट्रीसिटी सॉकेट 

बनाया और अपने बोस को दिखाया लेकिन उसके बोस को उसका अाइडिया पसंद नही आया और उसके बोस ने उसे ये कहकर रिजेक्ट कर दिया की ये मारकेट में नही चलेगा लेकिन उसे अपने उस सॉकेट पर पुरा विश्वास था कि ये मारकेट में जारुर चलेगा और विश्वास के दम पर उसने नौकरी छोड़ अपना खुद का  काम करने की ठान ली और उसके लिये अपने कुछ दोस्तो से बात - चीत की लेकिन उसके सभी दोस्तो ने उससे कहा की अपनी लगी लगाई अच्छी खासी नौकरी को छोड़ कर खुदका काम करने का विचार एक पागल पन हैं और वो भी ऐसा प्रोडक्ट के लिये जिसे उस के अनुभवी बोस ने पहले से ही रिजेक्ट कर दिया हो ।
वो मारकेट चलेगा भी या नही इसकी भी कोई गारंटी नही है़ं और ऊपर से तुम ज्यादा पढ़े लिखे भी नही हो और ना  ही  तुम्हारे पास Business करने का तरिका ना कोई अनुभव हैं तुम्हारा कामयाब होना लग- भग नामुम्किन हैं लेकिन उसे खुद पर विश्वास था और अपने उस प्रोडक्ट पर भी विश्वास था तो उसने एक बडा़ फैसला लिया उसने अपनी नौकरी छोड़ दी और अपनी थोड़ी सी जमा पुँजी के साथ कुछ बेसिक टूल्स खरीद लिया और अपने साथ काम करने वाले दो को वर्कर अपने छोटे भाई और अपनी पत्नी के साथ घर पर ही बनाई बहुत ही एक छोटी सी फैक्ट्री डालकर काम की शुरुवात की और सॉकेट बनाने लगे और खुद ही जगह - जगह लाईट सॉकेट बेचने की कोशिश करने लगा लेकिन उसके लाईट सॉकेट को सभी जगह रिजेक्ट कर दिया जाता और कुछ माहिने यु ही गुजर गये लेकिन उसे केवल कुछ ही छोटे-मोटे अॉडर मिले गुजारा करना बेहद मुश्किल हो गया और हालत बेहद खराब हो गया बुरे हालत को देखते हुये । वे  उसके दोनो वर्कर ने उसका साथ छोड़ दिया और अब वे केवल 3 लोग ही बचे थे आर्थिक स्थिति इतनी खराब हो गई की घर का खर्च चलाने के लिये उसे अपने घर का समान भी बेचना पड़ा ।और ऊपर से अपने सपने को पुरा करने के लिये कुछ कर्ज भी लेना पड़ा।
चारो तरफ केवल कर्ज और रिजेक्शन हर दिन वो एक नई कोशिश करता अपने सॉकेट को बेचने का और हर दिन वो फैल हो जाता और कई बार उसे लगता की उसे फिर से अपने सपने को छोड़ देना चाहिए और फिर से उसे अपनी पुरानी नौकरी शुरू कर लेनी चाहिए लेकिन विश्वास उसे कुछ दिन और कोशिश के लिये हौसला देता और वो फिर से निकन जाता एक और कोशिश के लिये और फिर फैल होकर लौट आता हालात बत से बतर होने लगे लग-भग दिवलिया हो चुके उस यूवक के पास अब नौकरी ही एक मात्र विकल्प था अपनी अर्थिक स्थिति को सुधारने का और यही राये उसके दोस्तो की भी थी की उसे अपनी जीद्द छोड कर फिर से नौकरी कर लेनी चाहिए उसका अपने प्रोडक्ट पर विश्वास इतना अटूट था की हार मानने को तैयार नही था और तभी एक दिन अचानक उसकी कम्पनी को 1000 हजार pieces का पहला ऑडर मिला और उस दिन केन बाद उसके बिजनेस मे एक नया रफतार पकड़ लिया और उसकी कम्पनी तेजी से तराक्की करने लगी और उसे कभी पिछे मुड़कर देखना नही पड़ा और आज उस कम्पनी में 2,50,000 से भी ज्यादा लोग काम करते है। जिसका सालना टर्नओवर लग-भग 70 हजार मिलियन डौलर है ।
और सब उस व्यक्ति ने किया जो ना ज्यादा पढ़ा लिखा शिक्षित था और ना ही उसके पास ज्यादा पैसा और ना ही कोई खाश बडी सपोर्ट बस उसके पास अगर कुछ था तो वो था उसका विश्वास जो एक दम अटल था ।
और दोस्तो उस सक्श की बनाई कम्पनी का नाम है 

Panasonic जिसकी प्रोडक्ट आज quality की पहचान है 
दोस्तो konosuke का देहांत 94 वर्ष की उम्र मे हो गया लेकिन Panasonic आज पुरे विश्व में फैल चुका है और जिसकी नीति थी केवल एक व्यक्ति का विश्वाहो था 
दोस्तो ये थी कहानी एक व्यक्ति के विश्वास की क्या पास भी कोई ऐसी वजह है जिस विश्वास के लिये आप अपना सब कुछ दाव पर लगाने के लिये तैयार हो जायें।

नीचे comment में जारुर बताये 

                  धन्यवाद 

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