चीन को चाहिये छततीसगढ़ की भाजी कोरोनावायरस से लड़ने के लिए

 : गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय के वनस्पति विभाग में छत्तीसगढ़ की 36 भाजियों पर रिसर्च चल रहा है। ताजा रिसर्च में पता चला है कि 10 भाजियों में कोरोना से लड़ने की भरपूर क्षमता है। रोग प्रतिरोधक क्षमता को दुरुस्त रखने के लिए इन भाजियों में पर्याप्त मात्रा में आयरन, कार्बोहाइड्रेट, फाइबर और प्रोटीन मिलता है।
औषधीय गुणों के कारण 'चरोटा' की मांग चीन, मलेशिया और ताइवान में काफी है। वनस्पति विभाग के अध्यक्ष डॉ. अश्विनी दीक्षित के निर्देशन में यह रिसर्च किया गया है। उनका कहना है कि प्रारंभिक रिसर्च में यह स्पष्ट हुआ है कि चौलाई, राजगीर, पोई, बथुआ, कुसुम, चरोटा, चेंच, करमता और सुनसुनिया जैसी प्रमुख 10 भाजी रोग प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखने में अधिक कारगर हैं।
एंटी ऑक्सीडेंट गुण के आधार पर भी स्पष्ट है कि कैंसर जैसी बीमारियों को मात देने के साथ कोरोना से लड़ने में ये सक्षम हैं। भाजियों का कराया जाएगा पेटेंट सीएमडी पीजी कॉलेज के प्राध्यापक प्रो.पीएल चंद्राकर भी भाजियों को लेकर काफी समय से काम कर रहे हैं। उनका कहना है कि इन भाजियों का जल्द पेटेंट कराने की आवश्यकता है।
तीन साल पहले जांजगीर-चांपा के कृषक दीनदयाल यादव ने इंदिरा गांधी कृषि विवि के वैज्ञानिकों के साथ मिलकर इन सभी भाजियों के पेटेंट के लिए पौधा किस्म और कृषक अधिकार को लेकर केंद्र सरकार के पास आवेदन भी दिया था।
प्रमुख बीमारियों के लिए दवा
प्रो.दीक्षित का यह भी कहना है कि इन भाजियों का इस्तेमाल औषधि के रूप में भी किया जाता है। चरोटा का वैज्ञानिक नाम केशिय टोरा है। चरोटा को हर्बल प्रोडक्ट, चर्म रोग के लिए मलहम, फंगस व वातरोग की दवा बनाने में किया जाता है। अन्य नौ भाजियां सर्दी खांसी, सूजन, पेचिस, कब्ज, पेट दर्द, ब्लड प्रेशर, शुगर एवं अन्य बीमारियों से बचाने में कारगर हैं।
उत्तर प्रदेश, बिहार व मध्य प्रदेश में राजगीर भाजी प्रो.दीक्षित का कहना है कि यह भाजी सिर्फ छत्तीसगढ़ में होती है। वातावरण के हिसाब से देश के अन्य राज्यों में भी रिसर्च किया जा सकता है। उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, झारखंड जैसे राज्यों में राजगीर भाजी होती है, लेकिन वहां लोग इसे सब्जी के रूप में इस्तेमाल नहीं करते।
छत्तीसगढ़ प्रमुख निर्यातक राज्य
देशभर से बीते वर्ष पांच हजार टन चरोटा बीज का निर्यात हुआ था। प्रमुख निर्यातक राज्यों छगत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान व बिहार हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ के बिलासपुर व रायपुर संभाग से सर्वाधिक निर्यात होता है। इन दोनों संभाग से ढाई हजार टन अकेले निर्यात किया जाता है। देश के लिए चरोटा बीज का सबसे बड़ा बाजार चीन, मलेशिया व ताइवान है। कोरोना संकट के चलते बाजार में तेजी भी आई है।
वर्ष 2018-19 में प्रति क्विंटल 1600 से 1700 रुपये बिकने वाला चरोटा 2000 से 2500 रुपये कीमत पर निर्यात हुआ। आम तौर पर जून-जुलाई में इसकी फसल की शुरुआत होती है। बारिश के समय में सब्जी के रूप में व जून के महीने में जब यह पककर तैयार हो जाता है तब इसका बीज निकाला जाता है। कृषि अनुसंधान केंद्र की देखरेख में बीज की प्रोसेसिंग व पैकेजिंग की जाती है।
इनका कहना है
इस वर्ष चीन, मलेशिया व ताइवान तीनों ही देशों से चरोटा की काफी मांग रही। राज्य से ढाई हजार क्विंटल का निर्यात किया गया है। विदेशों से आई मांग के चलते स्थानीय बाजार में इस बार आपूर्ति का संकट गहरा गया है।
भूपेंद्र सिंह चंदेरिया, प्रमुख निर्यातक,चरोटा

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